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Thursday, 25 July 2019
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कंगना ने कहा-मानती हूं, बात रखने का मेरा तरीका सही नहीं था, मगर पानी सिर से ऊपर चला गया था
अमित कर्ण. ‘जजमेंटल है क्या’ के प्रमोशन इवेंट में एक जर्नलिस्ट के साथ विवाद होने के बाद एक्ट्रेस कंगना रनोट एक बार फिर लोगों और मीडिया के निशाने पर हैं। पहले कुछ मीडिया कर्मियों ने कंगना पर बैन इंपोज किया, फिर देश की सबसे बड़ी न्यूज एजेंसी पीटीआई ने भी उनका बॉयकॉट कर दिया। बदले में कंगना रनोट ने जर्नलिस्ट एसोसिएशन और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया को लीगल नोटिस भेजा। इस मामले के बाद ज्यादातर जगह यह धारणा बन गई है कि कंगना रनोट का रवैया सही नहीं है। कंगना इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा करने, हर कड़े प्रश्न का उत्तर देने और अपना पक्ष रखने दैनिक भास्कर के सवालों की अदालत में हाजिर हुईं।
यही कि अकेली जान के लिए संघर्ष करना मुश्किल तो है। दरअसल मीडिया के चंद लोग बड़े स्टार्स के कहने पर गोलबंद होते रहे हैं। वे मुझ पर बेबुनियाद आरोप लगाते रहे हैं। हकीकत यह है कि मैं अपने पर्सनल डिफरेंसेज काम के आड़े नहीं आने देती। बड़ी जद्दोजहद के बाद इस मुकाम पर आई हूं। अपनी मेहनत की डिसरेस्पेक्ट होने के चलते मैं उस इवेंट में ब्रेकडाउन हुई। जिस जर्नलिस्ट के साथ मेरा विवाद हुआ, वह ‘मणिकर्णिका’ की सक्सेस पार्टी के वक्त मेरे घर आए थे। मैं लोगों के साथ पर्सनल रिलेशन कायम करने में यकीन रखती हूं। यह नहीं कि लोगों से वाया मैनेजर या सेक्रेटरी के जरिए संवाद करूं। मैं बड़ी अप्रोचेबल हूं। उस जर्नलिस्ट के साथ भी मैं सिर्फ प्रोफेशनल रिश्ता नहीं रखता चाहती थी पर वहां वे चिल्लाने लगे, आरोप मढ़ने लगे। वह वीडियो भी पब्लिक है। मीडिया को भड़काने की कोशिश की गई। जब पानी सिर से ऊपर गया तो तब मुझे इवेंट में अपना पक्ष रखने वाला रास्ता अख्तियार करना पड़ा। मैं जानती हूं कि वह तरीका सही नहीं था पर मेरे पास कोई और चारा भी नहीं था। ना ही कोई और रास्ता मैं जानती भी थी। मैं पूरे वाकये को इसी तरह देखना चाहूंगी।
मैं इस फिलॉसफी में पूरी तरह यकीन रखती हूं। अपने शत्रुओं को आप लगातार इग्नोर करते रहें, तो आगे भी आप बार-बार उनके अटैक के शिकार होते रहेंगे। लिहाजा कई बार उन्हें जताना जरूरी होता है कि आपको उनके एजेंडे के बारे में पता है। पर हां, इरादतन उनको नुकसान पहुंचाने की मंशा नहीं होनी चाहिए। मन में जो है, वह जाहिर कर दें, मगर लंबे अरसे तक मन में कड़वाहट नहीं रखनी चाहिए। मैं दूसरों का बुरा करने में यकीन नहीं रखती।
उस वीडियो में मैंने सबको देशद्रोही नहीं कहा। वह एक व्यक्ति विशेष को लेकर था, जो जर्नलिस्ट हैं, पर उन्होंने शहीदों का मजाक उड़ाया था। उस इंसान ने एनवॉयरनमेंट डे का मजाक उड़ाया था। मैंने दरअसल एक संदेश देश के आम लोगों तक पहुंचाया था। अपनी कोई दु:ख भरी दास्तान तो सुना नहीं रही थी। फिर भी उस मैसेज का मजाक उस इंसान ने उड़ाया था। उस इंसान ने मेरा पर्सनली मजाक नहीं उड़ाया था, उस इंपॉर्टेंट मैसेज का मजाक उड़ाया था। तब मैंने वीडियो जारी किया और देश की समस्याओं के खिलाफ बोलने वाले को देशद्रोही कहा। बतौर जर्नलिस्ट भी आप आंसरेबल हैं। अगर आज कोई मेरी फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ का मजाक उड़ाता है, तो वह देशद्रोही नहीं है, पर कोई ‘मणिकर्णिका’ के महान किरदारों का मजाक उड़ाए तो वह देशद्रोही जरूर है।
मुझे नहीं लगता कि किसी को किसी से माफी मांगने की जरूरत है। न उन्हें और न ही मुझे। मैंने उन्हें भद्दी बात नहीं कही थी। मैंने तो यही कहा था कि यार तुम तो मेरे दुश्मन बन गए हो? मैंने लाइन क्रॉस नहीं की थी, पर कोई बात नहीं। वो लोग आगे आते हैं तो मैं मूव ऑन होने को तैयार हूं। यह भी कहूंगी कि अगर इसी मसले को रेस्पेक्टफुली डील किया गया होता तो यह नौबत नहीं आती।
दरअसल वह मामला तूल पकड़ना ही था। वह इसलिए कि मैं मेरे खिलाफ स्मीयर कैंपेन चलाने वाले चंद लोगों को यह जताना चाहती थी कि वे खुमारी में न रहें। मुझे पता है कि किन मूवी माफियाओं के कहने पर मेरे खिलाफ यह सब वे कर रहे हैं। मैं वह जाहिर कर रही थी, अपनी बात के जरिए। वरना जर्नलिस्टों पर बाकी स्टार्स की बदसलूकी भी जाहिर है। नाम नहीं लूंगी मगर स्टार्स ने पूर्व में जर्नलिस्टों के साथ हाथापाई भी की है। गंदी गालियां भी देते रहे हैं, पर तब बात आगे नहीं बढ़ी। कंगना ने मगर रिटेलिएट किया तो वह सबको नागवार गुजरा। वे चंद लोग मुझे कह देते हैं ‘कमिंग फ्रॉम नो ह्वेयर’। ऐसा नहीं है। मेरे मां-बाप हैं। बहरहाल, मैं उन चंद लोगों के रैकेट से और इतनी नफरत से तंग आ चुकी थी। मुझे अपनी बात रखनी ही थी।
वहम तब होता, जब मेरे खिलाफ एकाध बार लिखा जाता। पर्सनली मिलकर मतभेद सॉल्व करने की कोशिश हुई होती। दूसरे एक्टर्स के मामलों में अगर मीडियोकर परफॉर्मेंस भी एक्टर ने की हो तो वह उन चंद जनर्लिस्ट्स को सही लग जाती है, पर मैं ऊफ्फ भी कर दूं तो वह बहुत बड़ा गुनाह हो जाता है।
इस बात को तो मना नहीं करूंगी कि मैं जरा सी सनकी तो हूं। सनक नहीं होती तो 15 साल की ही उम्र में घर से भागकर यहां नहीं आती। मुझे जो लोग समझ में आते हैं, मैं उनके पांवों में बिछ जाती हूं। जो नहीं समझ आते, फिर तो उनसे हाथ तक नहीं मिला सकती। यह जिद्दीपन मुझमें बचपन से है। हालांकि अपनी इस पसंद और नापसंद को वर्क एनवॉयरमेंट में नहीं आने देती। यह मेरा पेशेवर अंदाज है तभी मैं सर्वाइव कर रही हूं। वरना इंडस्ट्री में ना तो मैं किसी कैंप में हूं, न किसी ग्रुप या गैंग ही में हूं।
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Kangna Ranaut interview
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कंगना ने कहा-मानती हूं, बात रखने का मेरा तरीका सही नहीं था, मगर पानी सिर से ऊपर चला गया था अमित कर्ण. ‘जजमेंटल है क्या’ के प्रमोशन इवेंट में एक जर्नलिस्ट के साथ विवाद होने के बाद एक्ट्रेस कंगना रनोट एक बार फिर लोगों और मीडिया के निशाने पर हैं। पहले कुछ मीडिया कर्मियों ने कंगना पर बैन इंपोज किया, फिर देश की सबसे बड़ी न्यूज एजेंसी पीटीआई ने भी उनका बॉयकॉट कर दिया। बदले में कंगना रनोट ने जर्नलिस्ट एसोसिएशन और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया को लीगल नोटिस भेजा। इस मामले के बाद ज्यादातर जगह यह धारणा बन गई है कि कंगना रनोट का रवैया सही नहीं है। कंगना इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा करने, हर कड़े प्रश्न का उत्तर देने और अपना पक्ष रखने दैनिक भास्कर के सवालों की अदालत में हाजिर हुईं। यही कि अकेली जान के लिए संघर्ष करना मुश्किल तो है। दरअसल मीडिया के चंद लोग बड़े स्टार्स के कहने पर गोलबंद होते रहे हैं। वे मुझ पर बेबुनियाद आरोप लगाते रहे हैं। हकीकत यह है कि मैं अपने पर्सनल डिफरेंसेज काम के आड़े नहीं आने देती। बड़ी जद्दोजहद के बाद इस मुकाम पर आई हूं। अपनी मेहनत की डिसरेस्पेक्ट होने के चलते मैं उस इवेंट में ब्रेकडाउन हुई। जिस जर्नलिस्ट के साथ मेरा विवाद हुआ, वह ‘मणिकर्णिका’ की सक्सेस पार्टी के वक्त मेरे घर आए थे। मैं लोगों के साथ पर्सनल रिलेशन कायम करने में यकीन रखती हूं। यह नहीं कि लोगों से वाया मैनेजर या सेक्रेटरी के जरिए संवाद करूं। मैं बड़ी अप्रोचेबल हूं। उस जर्नलिस्ट के साथ भी मैं सिर्फ प्रोफेशनल रिश्ता नहीं रखता चाहती थी पर वहां वे चिल्लाने लगे, आरोप मढ़ने लगे। वह वीडियो भी पब्लिक है। मीडिया को भड़काने की कोशिश की गई। जब पानी सिर से ऊपर गया तो तब मुझे इवेंट में अपना पक्ष रखने वाला रास्ता अख्तियार करना पड़ा। मैं जानती हूं कि वह तरीका सही नहीं था पर मेरे पास कोई और चारा भी नहीं था। ना ही कोई और रास्ता मैं जानती भी थी। मैं पूरे वाकये को इसी तरह देखना चाहूंगी। मैं इस फिलॉसफी में पूरी तरह यकीन रखती हूं। अपने शत्रुओं को आप लगातार इग्नोर करते रहें, तो आगे भी आप बार-बार उनके अटैक के शिकार होते रहेंगे। लिहाजा कई बार उन्हें जताना जरूरी होता है कि आपको उनके एजेंडे के बारे में पता है। पर हां, इरादतन उनको नुकसान पहुंचाने की मंशा नहीं होनी चाहिए। मन में जो है, वह जाहिर कर दें, मगर लंबे अरसे तक मन में कड़वाहट नहीं रखनी चाहिए। मैं दूसरों का बुरा करने में यकीन नहीं रखती। उस वीडियो में मैंने सबको देशद्रोही नहीं कहा। वह एक व्यक्ति विशेष को लेकर था, जो जर्नलिस्ट हैं, पर उन्होंने शहीदों का मजाक उड़ाया था। उस इंसान ने एनवॉयरनमेंट डे का मजाक उड़ाया था। मैंने दरअसल एक संदेश देश के आम लोगों तक पहुंचाया था। अपनी कोई दु:ख भरी दास्तान तो सुना नहीं रही थी। फिर भी उस मैसेज का मजाक उस इंसान ने उड़ाया था। उस इंसान ने मेरा पर्सनली मजाक नहीं उड़ाया था, उस इंपॉर्टेंट मैसेज का मजाक उड़ाया था। तब मैंने वीडियो जारी किया और देश की समस्याओं के खिलाफ बोलने वाले को देशद्रोही कहा। बतौर जर्नलिस्ट भी आप आंसरेबल हैं। अगर आज कोई मेरी फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ का मजाक उड़ाता है, तो वह देशद्रोही नहीं है, पर कोई ‘मणिकर्णिका’ के महान किरदारों का मजाक उड़ाए तो वह देशद्रोही जरूर है। मुझे नहीं लगता कि किसी को किसी से माफी मांगने की जरूरत है। न उन्हें और न ही मुझे। मैंने उन्हें भद्दी बात नहीं कही थी। मैंने तो यही कहा था कि यार तुम तो मेरे दुश्मन बन गए हो? मैंने लाइन क्रॉस नहीं की थी, पर कोई बात नहीं। वो लोग आगे आते हैं तो मैं मूव ऑन होने को तैयार हूं। यह भी कहूंगी कि अगर इसी मसले को रेस्पेक्टफुली डील किया गया होता तो यह नौबत नहीं आती। दरअसल वह मामला तूल पकड़ना ही था। वह इसलिए कि मैं मेरे खिलाफ स्मीयर कैंपेन चलाने वाले चंद लोगों को यह जताना चाहती थी कि वे खुमारी में न रहें। मुझे पता है कि किन मूवी माफियाओं के कहने पर मेरे खिलाफ यह सब वे कर रहे हैं। मैं वह जाहिर कर रही थी, अपनी बात के जरिए। वरना जर्नलिस्टों पर बाकी स्टार्स की बदसलूकी भी जाहिर है। नाम नहीं लूंगी मगर स्टार्स ने पूर्व में जर्नलिस्टों के साथ हाथापाई भी की है। गंदी गालियां भी देते रहे हैं, पर तब बात आगे नहीं बढ़ी। कंगना ने मगर रिटेलिएट किया तो वह सबको नागवार गुजरा। वे चंद लोग मुझे कह देते हैं ‘कमिंग फ्रॉम नो ह्वेयर’। ऐसा नहीं है। मेरे मां-बाप हैं। बहरहाल, मैं उन चंद लोगों के रैकेट से और इतनी नफरत से तंग आ चुकी थी। मुझे अपनी बात रखनी ही थी। वहम तब होता, जब मेरे खिलाफ एकाध बार लिखा जाता। पर्सनली मिलकर मतभेद सॉल्व करने की कोशिश हुई होती। दूसरे एक्टर्स के मामलों में अगर मीडियोकर परफॉर्मेंस भी एक्टर ने की हो तो वह उन चंद जनर्लिस्ट्स को सही लग जाती है, पर मैं ऊफ्फ भी कर दूं तो वह बहुत बड़ा गुनाह हो जाता है। इस बात को तो मना नहीं करूंगी कि मैं जरा सी सनकी तो हूं। सनक नहीं होती तो 15 साल की ही उम्र में घर से भागकर यहां नहीं आती। मुझे जो लोग समझ में आते हैं, मैं उनके पांवों में बिछ जाती हूं। जो नहीं समझ आते, फिर तो उनसे हाथ तक नहीं मिला सकती। यह जिद्दीपन मुझमें बचपन से है। हालांकि अपनी इस पसंद और नापसंद को वर्क एनवॉयरमेंट में नहीं आने देती। यह मेरा पेशेवर अंदाज है तभी मैं सर्वाइव कर रही हूं। वरना इंडस्ट्री में ना तो मैं किसी कैंप में हूं, न किसी ग्रुप या गैंग ही में हूं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Kangna Ranaut interview Kangna Ranaut interview Kangna Ranaut interview https://ift.tt/2YoXNV9
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